जॉन एलिया साहेब

नमन

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एक शायर , एक कवि , एक दार्शनिक जॉन साहेब

विभाजन के कुछ समय बाद तक तो हिन्दुस्तान में ही रहे लेकिन अधिकतर परिवार जनों के पाकिस्तान चले जाने के कारण ये भी फिर वही जा के बस गए , लेकिन हिंदुस्तान हमेशा उनके दिल के करीब रहा ।
अदब में विश्व भर में पढ़े और सुने जाने वाले
दुनिया के शायर जॉन अब तक सब से अधिक पढ़े गए शायरों में शुमार है।
पैदाइश अमरोहा में हुई तो वही अपने जीवन की अंतिम साँस कराची में ली ।
हिंदी , उर्दू ,परशियन , हिब्रू अनेक भाषाओं पर अपनी पकड़ रखने वाले जॉन साहेब के प्रमुख संकलन —
शायद , यानि , गुमान , लेकिन , गोया , फरनोद है।
मात्र आठ वर्ष की उम्र में शेर कहने वाले इस महान शायर को नमन।
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मेरे कमरे को सजाने की तमन्ना है तुम्हे

मेरे कमरे में किताबो के सिवा कुछ भी नही ।

हैप्पी दीवाली

खुशियों को यूं ही फ़ैलाते रहिये
फूलो से हर घर महकाते रहिये।न अंधेरा हो कही , न हो नफरत
बस प्यार का दीपक जलाते रहिये ।

गुरु 🙏

गुरु 🙏संत कबीर ने गुरु की महिमा के लिए कहा है कि …गुरु गोविंद दोऊ खड़े , का के लागू पाय
बलिहारी गुरु आपणे , गोविंद दियो मिलाय ।🙏 🌹🌹🙏प्रथम उपराष्ट्रपति , द्वितीय राष्ट्रपति सर्वपल्ली डॉ राधाकृष्णन की जयंती ही शिक्षक दिवस के रूप में मनाई जाती है।
इनका कहना था कि सम्पूर्ण विश्व ही एक पाठशाला है जहॉ हर पल हम कुछ न कुछ सीखते रहते है ।
भारतिय संस्कृति के संवाहक , दार्शनिक , चिंतक एवं महान शिक्षविद डॉ राधाकृष्णन से जब एक बार उनके मित्रो ने कहा कि हम आपका जन्मदिन मनाना चाहते है तो उन्होंने बहुत ही सहजता से जवाब दिया कि यदि आप सभी एक ही दिन मेरा जन्मदिन मनाएंगे तो मुझे खुशी होगी , और ये ही वजह है कि सामूहिक रूप से हमडॉ राधा कृष्णन का जन्म दिवस ही आज शिक्षक दिवस के रूप में मनाते है।
चेन्नई से 50 किलोमीटर दूर तिरुतणी का वो स्कूल ” बरगद के पेड़ ” से मशहूर था जहाँ इनकी प्रारंभिक शिक्षा हुई थी और इनका घर अब एक लाइब्रेरी का रूप ले चुका है जहाँ अनेक विद्यार्थी आज भी ज्ञान प्राप्त करते है।
प्रतेयक व्यक्ति के जीवन मे सफलता की प्रथम सीढ़ी गुरु
ही होता है और आज का दिन उसी गुरु को समर्पित
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वैसे तो गुरु के लिए हमेशा दिल मे श्रद्धा , सम्मान मौजूद रहता है पर आज का दिन विशेष रूप से गुरु की याद में ।
शब्द गुरु का शब्द है काया का गुरु काय
भक्ति करै नित शब्द की सत्गुरु यौ समुझाय।।#कबीर
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गणपति बप्पा मोरिया अगले बरस तू जल्दी आ 🙏

गणेश महोत्सव
ॐ गं गणपतये नमः
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आज भौगोलिक दूरियों के सिमट जाने के कारण
विनायक चतुर्थी सम्पूर्ण भारत मे ही नही बल्कि विश्व के अलग अलग भागो में भी शिव पार्वती के पुत्र गणेश के जन्म दिवस के रूप में बड़े ही धूमधाम से मनाई जाती है ।
ज्ञान , समृद्धि , सौभाग्य के प्रतीक श्री गणेश देवो के देव है , और यदि हम इतिहास की ओर एक नज़र डालें तो गणपति पूजन की परंपरा चालुक्य , सातवाहन शासन काल में भी देखने को मिलती है इतना ही नही छत्रपति शिवाजी ने भी अपने शासन काल मे राष्ट्रीय एकता और अखंडता की भावना को बढ़ाने के लिए गणेश वंदना को महत्व दिया ।
हमारी सांस्कृतिक पहचान का पर्याय बना गणेश चतुर्थी भाद्र में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को मनाया जाता है ।
वैसे कृष्ण जन्मोत्सव के तुरंत बाद से ही सब गणेश चतुर्थी की तैयारी में जुट जाते है।
लगभग 10 दिनों तक चलने वाला ये महोत्सव मराठी संस्कृति का मुख्य पर्व है लेकिन सम्पूर्ण भारत की मुख्य संस्कृति का एक अहम हिस्सा है।
भगवान गणेश जो विघ्नहर्ता भी कहलाते है हिन्दू धर्म के परम पूजनीय देवता माने जाते है , किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत गणेश पूजन से ही होती है।
देव गणेश को सकारात्मक ऊर्जा से से भी जोड़ा जाता है , कहा जाता है कि भगवान गणेश आसानी से प्रसन्न हो जाते है हम हल्दी या कुमकुम लगे चावल से भगवान की पूजा करे तो मन की मुराद पूरी होती है , इनको मोदक बड़े प्रिय है और इसी कारण इनको मोदक प्रिय भी कहा जाता है ।
गणपति बप्पा बिना विघ्न के आप के कार्यो को करते है
यदि आप सच्चे दिल से उनको याद करते है

” ऊँ वक्रतुण्ड़ महाकाय सूर्य कोटि समप्रभ ।
निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा ।। ”
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गणपति का वर्ण लाल है इसीलिए इनकी पूजा में लाल वस्त्र , लाल पुष्प व रक्तचंदन का प्रयोग किया जाता है
साथ ही गणपति बप्पा को मोदक , गेंदा पुष्प , दूर्वा घास ( तीन या पांच फुनगी वाली ) , शंख और कदली फल भी अत्यंत प्रिय है ।
अतः इन वस्तुओं को भी गणपति को अर्पित करना चाहिए जिससे ये हमेशा प्रसन्नं रहते है।
गणपति बप्पा मोरिया अगले बरस तू जल्दी आ।
हे मंगलकारी पिता आप अगले बरस जल्दी आना ।
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चंद्रादित्यो च धरणी विद्युद्ग्निंस्तर्थव च |

त्वमेव सर्वज्योतीष आर्तिक्यं प्रतिगृह्यताम ||
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जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।

माता जाकि पार्वती पिता महादेवा।।

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।

एक दन्त दयावंत चार भुजा धारी।

माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी।।

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।

अन्धन को आंख देत कोढ़िन को काया।

बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया।।

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।

हार चढ़े फुल चढ़े और चढ़े मेवा।

लड्डूवन का भोग लगे संत करे सेवा।।

जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा।

माता जाकि पार्वती पिता महादेवा।।
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